यदुवंशी टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ उत्तर प्रदेश में नगर निगम चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। अब नगर निगम चुनाव बिना ओबीसी आरक्षण के होंगे। जी हां…इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए यह अहम फैसला आज (27 दिसंबर) सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो, तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। सरकार बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवाए।
यूपी निकाय चुनाव को लेकर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 5 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने के आदेश दिए हैं। यह फैसला न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने दाखिल 93 याचिकाओं पर एक साथ सुनाया है।
हाई कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, ओबीसी के लिए आरक्षित अब सभी सीटें जनरल मानी जाएंगी। तो वहीं, इस फैसले के बाद यूपी में नगर निकाय चुनाव अधिसूचना जारी होने का रास्ता भी साफ हो गया है। तो वहीं, लखनऊ बेंच ने ओबीसी आरक्षण पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण देने के लिए एक कमीशन बनाया जाए, तभी ओबीसी आरक्षण दिया जाए। सरकार ट्रिपल टी फॉर्मूला अपनाए, जिसमें समय लग सकता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसे में अगर सरकार और निर्वाचन आयोग चाहे तो चुनाव करा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में याची पक्ष की तरफ से कहा गया था कि निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण एक प्रकार का राजनीतिक आरक्षण है। इसका सामाजिक, आर्थिक अथवा शैक्षिक पिछड़ेपन से कोई लेना देना नहीं है। ऐसे में ओबीसी आरक्षण तय किए जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत डेडिकेटेड कमेटी द्वारा ट्रिपल टेस्ट कराना अनिवार्य है।
