बिना पद के कुण्डली जमाये बैठे वरिष्ठ लिपिक का पदोन्नति नियम विरुद्ध

Shareयदुवंशी टाइम्स न्यूज नेटवर्क कुशीनगर उच्च न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाने व बिना पद के कुण्डली जमाये बैठे वरिष्ठ लिपिक का पदोन्नति नियम विरुद्ध है, ऐसा जानकारों का...

यदुवंशी टाइम्स न्यूज नेटवर्क

कुशीनगर उच्च न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाने व बिना पद के कुण्डली जमाये बैठे वरिष्ठ लिपिक का पदोन्नति नियम विरुद्ध है, ऐसा जानकारों का दावा है। जब डीआईओएस दफ्तर मे वरिष्ठ लिपिक का पद ही नही सृजित है तो फिर डीआईओएस कार्यालय में कनिष्क लिपिक रहे सुभाष यादव का उसी डीआईओएस आफिस मे वरिष्ठ लिपिक के पद पर पदोन्नति कैसे हो गया? सवाल जायज है जो न सिर्फ जांच का विषय है बल्कि जिम्मेदारो की जवाबदेही भी है।

गौरतलब है कि जनपद बनने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय कुशीनगर मे डीआईओएस व लेखाधिकारी सहित कुल नौ पद सृजित है जिसमे कर्मचारियों की संख्या सात है। डीआईओएस और लेखाधिकारी के अलावा सात कर्मचारियों मे आशू लिपिक एक, लेखाकार एक, कनिष्ठ लिपिक एक, दफ्तरी,एक, अर्दली एक, चालक एक, व चपरासी का एक पद सृजित है। बताया जाता है कि वर्ष 2021 मे कुशीनगर डायट से कनिष्ठ सहायक के पद से स्थानांतरित होकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पहुंचे सुभाष प्रसाद यादव ने 26 जुलाई -2021 को कनिष्ठ सहायक के पद पर ज्वाइनिंग किया था। कहना ना होगा कि डीआईओएस दफ्तर मे एक वर्ष दो माह अट्ठारह दिन कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्य करने के बाद उनका 14 अक्टूबर-2022 को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति हो गया। मजे की बात यह है जिस वरिष्ठ सहायक के पद पर सुभाष यादव 14 अक्टूबर-2022 से पदोन्नति होकर कार्य कर रहे है वह पद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे सृजित नही है ऐसे में सवाल यह है कि जब डीआईओएस दफ्तर मे पद ही नही है तो फिर उनका पदोन्नति हुआ कैसे? सूत्र बताते है कि सुभाष के पदोन्नति के दौरान गोरखपुर मण्डल मे आधा दर्जन कनिष्ठ सहायको का प्रमोशन हुआ था जिसमे अधिकाशं बिना पद का नियम विरुद्ध पदोन्नति किया गया है जो जांच का विषय है।

माध्यमिक शिक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि जिस विभाग मे पद सृजित न हो वहा बिना पद के पदोन्नति नही हो सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि डीआईओएस कार्यालय कुशीनगर मे वरिष्ठ सहायक का पद सृजित नही है ऐसे में कनिष्ठ सहायक का पदोन्नति वरिष्ठ सहायक के पद पर किसी भी सूरत मे नही हो सकती है। विधि विशेषज्ञों का दावा है कि सुभाष प्रसाद यादव का पदोन्नति नियम विरुद्ध व अवैध तरीके से हुई है निष्पक्ष जांच हुई तो दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जायेगा।

जानकारों के तर्क के अनुसार अगर सुभाष प्रसाद यादव का पदोन्नति नियम विरुद्ध है तो फिर तीन वर्षों से वरिष्ठ सहायक पद का लाभ लेते हुए डीआईओएस दफ्तर में कुण्डली जमाये बैठे है वेतन आहरण पर भी सवाल उठना स्वभाविक है? यहां बताना जरूरी है कि सुभाष यादव की चपरासी के पद पर हुई नियुक्ति के बाद नियम विरुद्ध पदोन्नति पाकर बने वरिष्ठ सहायक तक सफर पर गौर करे तो लगभग 26 वर्षो से नौकरी कर रहे है। इस दरम्यान एक बार उनका स्थानांतरण देवरिया जनपद के रामपुर कारखाना स्थित डायट पर हुआ था किन्तु अपने रसूख के दम पर महज ढाई महीने बाद ही कुशीनगर वापस लौट आये जबकि शासनादेश के मुताबिक एक पटल पर किसी कर्मचारी को तीन वर्ष व जनपद मे पांच वर्ष तक ही रहने का प्राविधान है। ऐसे में इनका लगभग 26 वर्षो से कुशीनगर में जमें रहना भी सवाल के घेरे में है।

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