विवादित 2.77 एकड़ जमीन राम लला विराजमान को दी जाय…सर्वोच्च न्यायालय

Share◆सुप्रीम कोर्ट ने कहा – तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई जाए। जिसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा। ◆मुख्य न्यायाधीश...

◆सुप्रीम कोर्ट ने कहा – तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाकर कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई जाए। जिसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा।
◆मुख्य न्यायाधीश ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए दिए जाने का फैसला सुनाया।

कुशीनगर कई वर्षों पुराना अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित भूमि राम मंदिर निर्माण के लिए दिया गया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने के अन्दर ट्रस्ट बनाकर इसकी योजना तैयार की जाए, और इसके तहत मंदिर निर्माण कराया जाय। मुख्य न्यायाधीश ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए दिए जाने का फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है और हिंदुओं की यह आस्था निर्विवाद है।

उक्त मामले पर 40 दिन सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।संविधान पीठ द्वारा 9 नवम्बर दिन शनिवार को 45 मिनट तक पढ़े गए 1045 पन्नों के फैसले ने देश के इतिहास के सबसे अहम और एक सदी से ज्यादा पुराने विवाद का अंत कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश एसए बोबोडे, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश अशोक भूषण, न्यायाधीश एस अब्दुल नजीर की पीठ ने स्पष्ट किया कि मस्जिद को अहम स्थान पर ही बनाया जाए। और विवादित जमीन रामलला को दी गई।जिसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा।

फैसले के मुख्य बिंदु

◆कोर्ट ने कहा- उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा।

◆सुप्रीम कोर्ट ने कहा-अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए।

◆ सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीता रसोई, राम चबूतरा और भंडार गृह की मौजूदगी इस स्थान की धार्मिक वास्तविकता के सबूत हैं।

◆ पीठ ने कहा- विवादित जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर चिह्नित थी।

◆सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था। ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है।

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