भगवन्त यादव (संवाददाता)
कुशीनगर अयोध्या विवाद सैकड़ों साल से भौतिक एवं न्यायिक विवाद का सर्वोच्च न्यायालय ने अन्ततः अन्तिम रूप से निस्तारण कर दिया है, न्यायालय ने एक तरफ विवादित स्थल को रामजन्मभूमि के रूप मे मान्यता दे दिया है, वही उक्त जमीन को किसी हिन्दू पक्ष को देने के बदले सरकार को दे दिया है, जो ट्रस्ट के माध्यम से भविष्य मे निर्माण संचालन एवं व्यवस्थापन करेगा, मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ जमीन देकर उनके पूजा-पाठ के अधिकार को भी मान्यता दिया है, लम्बे संघर्ष, विवाद, वार्ता पक्षो के बीच मध्यस्थता के विफल होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व सामग्री, ऐतिहासिक एवं पौराणिक तथ्यो, तथा आस्था एवं विश्वास को कानून की कसौटी पर निष्पक्षता पूर्वक परखा है तथा अपने निर्णय से पन्थ निरपेक्षता तथा कौमी सदभाव को पुष्ट किया है। उक्त बातें प्रेस वार्ता दौरान पूर्व विधायक मदन गोविन्द राव ने कही।
उन्होंने यह भी कहा कि देश एवं दुनिया की भारतीय न्याय तंत्र की निष्पक्षता के प्रति पहले से ही सकारात्मक दृष्टि रही है, इस फैसले ने उसी न्याय तंत्र मे भरोसा बढ़ाया है, इस अवसर पर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के धैर्य, संयम एवं लोकतांत्रिक मूल्यो के प्रति सम्वेदना की भी प्रशंसा किया जाना चाहिए, जिन्होंने गत लोकसभा चुनाव के पूर्व तमाम संगठनो द्वारा संसद द्वारा कानून बनाकर विवाद निपटारे हेतु डाले गये दबाव को चुनाव परिणाम की चिन्ता को दरकिनार कर विवाद निपटारे हेतु सर्वोच्च न्यायालय पर विश्वास किया । अब नागरिको को भी अपने धर्म का निर्वाह करना चाहिए।