सरकारी योजनाओं की बुलंद आवाज हैं, कवि ‘सावन’ की कविताएं

Shareभगवन्त यादव संवाददाता कुशीनगर बहुचर्चित युवाकवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ की कविताएं जन-मन की कविताएं होती हैं। आपकी कविताओं में सिर्फ आम आदमी के मन की ही आवाज नहीं होती है...

भगवन्त यादव संवाददाता

कुशीनगर बहुचर्चित युवाकवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ की कविताएं जन-मन की कविताएं होती हैं। आपकी कविताओं में सिर्फ आम आदमी के मन की ही आवाज नहीं होती है अपितु सरकारी योजनाओं के दिलों की धड़कन भी होती है। आप देश की सोचनीय समस्या कुपोषण को सरकार तक कुछ इस तरह से पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

होता रहेगा कब तक, मानवता का शोषण।
भूख से मरी गर्भवती, मार डाला कुपोषण।।

कन्या भ्रूणहत्या एक गंभीर समस्या है जिससे निपटने के लिए सरकार अनेक योजनाएं ( लाडली लक्ष्मी योजना, धनलक्ष्मी योजना , मुख्यमंत्री शुभ लक्ष्मी योजना, बेटी है अनमोल योजना, गर्ल प्रोटेक्शन स्कीम इत्यादि )चलाती है। सरकारी आवाज को कवि ‘सावन’ देश के प्रत्येक नागरिक तक कविताओं के माध्यम से पहुंचाते हैं; जैसे-

किस गलती की सजा देते हो, गर्भ में बेटियों को मार कर।
क्यों करते हो कलंकित मानवता को, इन्हें मौत के घाट उतार कर।।

पहले भटकती हुई दुनिया के समक्ष विचारात्मक प्रश्न प्रेषित करते हैं फिर बेटियों का गुणगान करते हैं-

बेटों से कम नहीं हैं आदिकाल से बेटियां।
बेटों से कम नहीं हैं आजकल की बेटियां।
जो नभ में उड़ान भरते हुए रचती हैं रोटियां।
जग को जगमगाने वाली ज्योति हैं बेटियां।
सागर की सीपी में छिपी मोती हैं बेटियां।
जन्नत बना कर दिखाती हैं, उजड़े घर को संवारकर।
किस गलती की सजा देते हो, गर्भ में बेटियों को मारकर……

वृक्षारोपण को लेकर हमारी सरकार अनेक योजनाएं (राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, राष्ट्रीय जल नीति, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम , वन संरक्षण अधिनियम इत्यादि ) चला रही है जिसमें लाखों-करोड़ों की धनराशि खर्च होती है। हम सभी नागरिकों का भी कर्तव्य है कि सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर वृक्षारोपण करें और देश को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाएं। कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ तो अक्सर कहते हैं कि हमारे प्राण पखेरू पेड़ों में बसते हैं। पेड़ ही हमारी जिंदगी हैं। पेड़- पौधों को आप “ऑक्सीजन की फैक्ट्री” भी कहते हैं। भारतवर्ष को संबोधित करते हुए आप विश्व को बचाने की बात करते हैं-

विश्व को बचाना है तो वृक्ष लगाना सीखो भारत।
बच्चों से प्यारे पौधों को पानी पिलाना सीखो भारत।

पर्यावरण की दुर्दशा को देखकर आप कुछ इस तरह चिंता व्यक्त करते हैं-

सूख रहे हैं आम – कटहल, कट रहे हैं नीमा- पीपल।
रूठ गई हैं धरती मैया, रूठ गये प्यारे बादल।।
सूखा पड़ने से पहले, नयी कहानी लिखो भारत।
विश्व को बचाना है तो वृक्ष लगाना सीखो भारत…..

एक वृक्ष दस पुत्र समाना, वृक्ष लगाओ विश्व बचाओ… जैसे नारों के माध्यम से सरकार सर्वत्र वृक्षारोपण करना चाहती है। हमें भी संतानोत्पत्ति, शादी ,जन्मदिन , सालगिरह …. जैसे शुभ अवसरों पर पौधारोपण अवश्य करना चाहिए। कवि ‘सावन’ कहते हैं-

मंदिर, मस्जिद , विद्यालयों को कर दो हरा-भरा मधुवन सा।
देख हरियाली जेठ दुपहरी बरसे रस रिमझिम सावन सा।।
मत बनो सोने की नगरी, चित्रकूट सा दिखो भारत।
विश्व को बचाना है तो वृक्ष लगाना सीखो भारत।।

ग्राम -अमवा बाजार, पोस्ट- रामकोला, जिला- कुशीनगर, उत्तर प्रदेश के निवासी कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ केंद्रीय विद्यालय टेंगा वैली अरुणाचल प्रदेश में स्नातकोत्तर शिक्षक (हिन्दी) पद पर सेवा प्रदान कर रहे हैं । एक शिक्षक होने के नाते शिक्षा व्यवस्था पर भी लेखनी चलाना लाजमी है।सरकार की तमाम योजनाएं( पढ़े भारत, बढ़े भारत, सर्व शिक्षा अभियान, महिला समाख्या कार्यक्रम इत्यादि) शिक्षा जगत को समर्पित हैं। ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ जैसे नारों की खुशबू आप अपनी कविताओं के माध्यम से देश-विदेश में बिखेरते हैं; जैसे-

छोड़ो चूल्हा, चौकी, रोटी।
आओ, पढ़ाई कर लो बेटी।।

घर का बाद में करना काम।
जग में रोशन कर लो नाम।।

विदुषी बन महको ज्यों फूल।
लो बस्ता जाओ स्कूल।।
पढ़ो लिखो छूलो नभ-चोटी।
छोड़ो चूल्हा, चौकी, रोटी।
आओ, पढ़ाई कर लो बेटी।।

कवि ‘सावन’ की कविताओं में समता का भाव दिखता है। आप स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि बेटियां बेटों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं-

नहीं हो तुम बेटों से कम।
शक्ति- स्नेह का हो संगम।।
दम दिखा दो अपना जग में।
पूरा कर लो सपना जग में।।
बड़ी हो तुम, दुनिया है छोटी।
छोड़ो चूल्हा, चौकी, रोटी।
आओ, पढ़ाई कर दो बेटी।।

जल ही जीवन है, लेकिन आज जल का जीवन ही खतरे में है। शुद्ध जल की कमी और जल प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है। यदि इस समस्या को लेकर हम सब गंभीर नहीं हुए तो भविष्य में यह विकराल रूप धारण कर सकता है। मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करते हुए कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ ने बहुत ही शानदार शब्दों में पानी का दुख-दर्द व्यक्त किया है।

जब खिलखिला कर बहेगी वसुधा पर जलधार।
तब बचेगा तुम्हारा घर, परिवार, संसार ।।
मनस्वी मनुष्यों!
तुम्हारे सामने टपकता हुआ पानी हूं मैं।
पानी नहीं जिंदगानी हूं मैं
तुम्हारे जीवन की मार्मिक कहानी हूं मैं।।

भ्रूण हत्या, नारी शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, कुपोषण इत्यादि समस्याओं को लेकर सरकार सचेत एवं गंभीर है। काश! देश का प्रत्येक नागरिक सरकारी योजनाओं के निर्देशानुसार अपने कर्तव्यों का पालन करता तो देश चांदनी की भांति चमचमा उठता। इसी सपना को साकार करने के लिए कलम चलाते हैं कलमकार सुनील चौरसिया ‘सावन’।

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