विमर्श साहित्यिक संस्था की 14वीं मासिक कवि गोष्ठी संपन्न

Shareकुशीनगर विमर्श साहित्यिक संस्था पडरौना की 14वीं मासिक कवि गोष्ठी स्थानीय नगर के हनुमान इंटर कॉलेज में संपन्न हुई जनपद के कोने-कोने से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की...

कुशीनगर विमर्श साहित्यिक संस्था पडरौना की 14वीं मासिक कवि गोष्ठी स्थानीय नगर के हनुमान इंटर कॉलेज में संपन्न हुई जनपद के कोने-कोने से आए कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की कार्यक्रम में अतिथि दीप नारायण अग्रवाल अरुण गौतम भोजपुरी पारंपरिक गीतों के गायक राम दरस शर्मा एवं ज्ञानवर्धक गोविंदराव जनार्दन जी मुकेश त्रिपाठी तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल के द्वारा मां सरस्वती को पुष्प अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलितकिया गया।

विमर्श के मासिक कवि गोष्ठी के विशेष मेहमान प्रसिद्ध लोक गायक राम दरश शर्मा जी द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पूजा पांडे ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया तत्पश्चात अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में जय कृष्ण शुक्ल, आकाश महेश्वरी, शैलेंद्र, असीम मुजीब सिद्धकी मौज, मधुसूदन पांडे, कृष्णा श्रीवास्तव,बलराम राय ,राघव शरण मिश्र,नंदलाल सिंह,कांति पति रत्नेश मिश्र, रतन, शैलेश उपाध्याय, असलम निजामी, मुकेश शर्मा, परमानंद मिश्र, रेणुका चौहान आदि ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की कविताएं मुख्य रूप से होली के रंग में रंगी हुई थी संगीत के कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक रामदास शर्मा एवं पूजा पांडे के द्वारा होली गीत प्रस्तुत किया गया तबले पर संघट करण कुमार ने किया जबकि हारमोनियम पर संगत संदीप साहू ने किया कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि जगदीश खेतान ने किया एवं संचालन आरके भट्ट बावरा ने किया कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की अग्रिम शुभकामनाएं दी एवं मेल मिलाप एवं भाईचारे से होली का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाने की कामना की होली पर आधारित कवियों की कुछ पंक्तियां इस प्रकार रहे जय कृष्ण शुक्ल ने पढ़ा मुख़्तसर सा यह जो गुलदान रखा है इसी का रब ने प्यारा नाम हिंदुस्तान रखा है आकाश महेश पुरी ने पढ़ा कैसे खेले महंगाई में भाई रंग अबीर कैसे खाएं हलवा पेठा पुआ पूरी खीर शैलेंद्र असीम ने पढ़ा मन फागुन फागुन हो जाए जबकि मुजीब सिद्धकी मौज ने पढ़ा कौन निकला है यार होली में करके सोलह सिंगार होली में रेणुका चौहान ने पढ़ा अंगार सजे हैं राहों में सिंगार भला कोई कैसे गाए आरके भट्ट बावरा पढ़ा की वर्षा और शरद ना आए दुंदुभी बसंत बजाए रहा नहीं जाए। जबकि शैलेश कुमार उपाध्याय ने पढ़ा जागो भारत के नौजवानों जगदीश खेतान कि पंक्तियों ने सभी को हंसते हंसते लोटपोट कर होने को मजबूर कर दिया हालात हमने इतनी पतली कर दिया है पाकिस्तान की ।
वहां पर सबको फिक्र हो गई अपने-अपने जानकी ।।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र दत्त शुक्ल ने सभी आगंतुक कवियों एवं संगीत कलाकारों का धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया

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