सौ काशी ना एक बासी

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● कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी।

कुशीनगर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमा पर लगे बांसी धाम कार्तिक पूर्णिमा के अवसर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पूजा अर्चना किए। बासी नदी त्रेता युग श्री रामचंद्र से जुड़ी है कहा जाता है कि भगवान राम इसी रास्ते जनकपुर गए थे जाते वक्त बांसी नदी पर स्नान ध्यान कर बाबा भोलेनाथ की शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चन किए थे तब से इस नदी का मान और बढ़ गया और कार्तिक पूर्णिमा तथा माघ पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का काफी भीड़ लगती है। उक्त स्थान के लिए एक उक्ति कहा गया है जो बहुत ही मशहूर है “100 काशी ना एक बांसी”

गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले इस स्नान पर्व के अवसर पर पड़ोसी देश नेपाल, बिहार पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अन्य स्थानों से लोग 1 दिन पूर्व स्नान के लिए आते है। तथा रात्रि विश्राम करते हैं और भोर से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर अपनी मनो कामना पूर्ण होने की कामना करते हैं लेकिन कोरोना के चलते श्रद्धालुओं में उत्त्साह देखने को नही मिला।।

युपी बिहार प्रशासन की रही कड़ी चौकसी

एतिहासिक बांसी मेले को लेकर स्थानीय बांसी चौकी पुलिस द्वारा विशेष चौकसी बरती गई। इस दौरान महिला पुलिस व पुरुष पुलिस के साथ पीएसी के जवान मेले में तैनात किया गया था.जबकि पूरी रात पुलिस टीम मेले में गश्त लगाते रहे।

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