यदुवंशी टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
कुशीनगर जिले के सीमा क्षेत्र से होकर बहने वाली नारायणी नदी का कहर लगातार जारी है। किसानों का सैकड़ो एकड़ खेती नदी के कटान में विलीन होता नजर आ रहा है। लगातार कई दिनों से हो रहे कटान से किसान दहशत में आ गए है। नदी की विनाशलीला थमने का नाम नही ले रही है। नदी बीते सप्ताह से किसानों की कृषि योग्य भूमि निगल रही है। प्रकृति की इस मार से एक बार फिर से खेती किसानी से जुड़े लोगों के सामने मुसीबत का पहाड़ खड़ा हो चुका है। प्रशासनिक स्तर से कोई समुचित प्रबन्ध न होने से आने वाले समय मे यहाँ के किसानों की भूमि नदी में विलीन हो जाएगी और किसान भूमिहीन के साथ एक-एक दाने को मोहताज हो जाएगा।
काविलेगोर है कि बरवापट्टी क्षेत्र के अमवाखास टोला रक्ताहिया, कैथवलिया और सउरहा के काश्तकारी जमीन पर बोई हुई धान की फसल लगभग सैकड़ो एकड़ नदी की कटान से नदी में विलीन हो गई है। किसान असहाय होकर अपनी जमीन नदी के कटान में जाते देखने को विवश है। नदी का तेवर यूँ ही बरकरार रहा तो खैरटिया गांव पर भी असर पड़ सकता है। उपजी हुई धान एवं गन्ने की फसल को किसान चारे के रूप में काटने पर मजबूर है। वही किसान इस कहर को कलेजे पर हाथ रखकर देखने को भी विवश है। अपने हिसाब से किसान धान और गन्ने की खेती करता है और उपज से पूरे परिवार का भोजन उपलब्ध कराता है। ऐसे में नारायणी नदी द्वारा कई दिनों से उपजाऊ जमीन पर लगातार कटान किया जा रहा है। किसान इस तरह विवश है कि जिस खेती को तैयार करके फसल उगाया और जैसे ही फसल तैयार होने को हुआ तो नदी ने अपना कहर बरपा दिया। विवशता इस कदर है कि उपजी हुई फसल को अपने हाथों से काटकर मवेशियों को चारा के रूप में खिलाने को मजबूर है। मानसून शुरू होते ही इस उम्मीद से किसान धान की खेती किया था कि फसल से साल भर बच्चो के साथ पूरे परिवार का भरण पोषण हो जाएगा। नदी के लगातार कटान को देखते हुए किसानों में रामेश्वर तिवारी, सफीक अंसारी, विनोद तिवारी, चंद्रभान, विनय तिवारी, दिनेश, बलदेव, शमसुल हक, अनवर, रियाज, बलिराम, एनुल, कन्हैया, छोटा, बालेश्वर सहित सैकड़ों किसान की धान और गन्ना बोई हुई फसल बेरहमी से काट रहे है।
