कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

Shareपरमेश्वर यादव कुशीनगर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमा पर लगे बांसी धाम कार्तिक पूर्णिमा के अवसर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पूजा अर्चना किए। बासी नदी त्रेता...

परमेश्वर यादव

कुशीनगर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमा पर लगे बांसी धाम कार्तिक पूर्णिमा के अवसर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और पूजा अर्चना किए। बासी नदी त्रेता युग श्री रामचंद्र से जुड़ी है कहा जाता है कि भगवान राम इसी रास्ते जनकपुर गए थे जाते वक्त बांसी नदी पर स्नान ध्यान कर बाबा भोलेनाथ की शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चन किए थे तब से इस नदी का मान और बढ़ गया और कार्तिक पूर्णिमा तथा माघ पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का काफी भीड़ लगती है। उक्त स्थान के लिए एक उक्ति कहा गया है जो बहुत ही मशहूर है “100 काशी ना एक बांसी”

 

गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले इस स्नान पर्व के अवसर पर पड़ोसी देश नेपाल, बिहार पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अन्य स्थानों से लोग 1 दिन पूर्व स्नान के लिए आते है। तथा रात्रि विश्राम करते हैं और भोर से ही श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर अपनी मनो कामना पूर्ण होने की कामना करते हैं ।

और मेला में दूरदराज से दुकानदार अपनी अपनी दुकानें लगाकर मेला का शोभा बढ़ाते हैं और तमाम प्रकार के झूला ट्रेन तथा मौत की कुआं इस मेले की शोभा बढ़ाते हुए दर्शकों का मन बहलाते हैं इस वर्ष मेले की व्यवस्था के लिए मेले से पूर्व से ही सांसद कुशीनगर विजय कुमार दुबे एवं जिलाधिकारी डॉ अनिल कुमार सिंह सहित उप जिलाधिकारी रामकेश यादव ने व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का आवश्यक निर्देश दिया था। इसी क्रम में बासी चौकी के साथ ही मेला नियंत्रण हेतु मेला में अलग से चौकी स्थापित की गई है ।जहां महिला एवं पुरुष सुरक्षाकर्मियों को प्रयाप्त मात्रा में तैनात किया गया था। इस बार मेले में निशुल्क चिकित्सा और रैन बसेरा की व्यवस्था किया गया था मेले की मुख्य जिम्मेदारी एसडीएम सदर रामकेश यादव और डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी को सौंपी गई थी ।

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