◆ कोरोना ने रिश्ते नाते को भी महा छुआ छूत मे बदला।
◆ गरीबों मजदूरों बेरोजगारों पर महाप्रलय भूखमरी बिपत्तिका पहाड़ बना।
◆ अपने ही घर मे कैद रहना व पुलिस के प्रताड़ना सहना पड़ा
◆ शिक्षा ब्यवस्था चौपट के कगारपर।
भगवन्त यादव संबाददाता
कुशीनगर कोरोना काल भारत की जनता के सामने 2020 इतिहास के पन्नों मे अमर रहेगा आजादी के 70 सालों के बाद यह कोरोना काल के रूप मे छूआछूत के रुप मे रिश्ते नाते को भी भूलाने पर मजबूर किया तथा गरीबों मजदूरों बेरोजगारों के ऊपर बिपत्ति का पहाड़ बनकर टूट पड़ा इसके साथ ही उद्योग धन्धे रोजगार भी चौपट होने लगे अपने घरो मे लोग जेल की तरह कैद रहे तथा कर्फ्यू के उल्लंघन मे पुलिस की प्रताड़ना डंडे खाना पड़ा तथा बाहर रोजगार करने वाले मजदूरों को ट्रेन बंद होने से सैकड़ों किमी चलने के बाद कुछ ने रास्ते में दम तोड़ दिया तो कुछ ने अपने आशियाना मे पहुंचे कोरोन्टाइन सेंटर से लेकर लोग अपने घरो मे आत्महत्या कर लिए जो घटनाएं दिल दहला दिये शिक्षा ब्यवस्था भी चरमरा गयी है नौनिहाल तो स्कूल के बजाय घरो व खेत खलिहानों मे समय बिता रहे है आनलाईन पढाई मोबाइल लैपटॉप के अभाव मे सपना हो गया है महज दो जून की रोटी हेतु रोजगार व शासन से अनुदान की आशा मे है तथा देश की 70 प्रतिशत जनता को आश है कि 2021मे ईश्वरीय शक्ति तथा बैज्ञानिकों की खोज ही जीवन मे उजाला ला सकता है यही कामना है।
