यदुवंशी टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
गौतमबुद्ध नगर ( उत्तर प्रदेश)
देश के संसाधनों एवं सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित तरीके से फलीभूत करने के लिए जातिगत जनगणना किस समय हर दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समाजसेवी एवं यदुवंशी कल्याण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अरुणेश यादव ने बताया कि सन 1857 से 1931 तक ब्रिटिश शासन काल में हर 10 वर्ष में जातिगत जनगणना हुई। दूसरे विश्व युद्ध के चलते 1941 में जातिगत जनगणना नहीं हो पाई। 1947 में हमारा देश आजाद हो गया, उसके बाद से लेकर अब तक 75 सालों में किसी भी सरकार ने जातिगत जनगणना की तरफ ध्यान नहीं दिया।
बड़े दुर्भाग्य की बात है कि एक तरफ हमारे देश में जानवरों पशु पक्षियों सभी की गिनती होती है लेकिन सरकार यह बताने को तैयार नहीं है कि देश में रहने वाले लोग किस जाति के और कितनी संख्या में है? कहीं ना कहीं सरकार की नीयत और मंशा पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया जा सकता है। देश के तमाम संसाधनों और सरकारी निकाय एवं निजी निकायों में प्रतिनिधित्व का सही तरीके से समायोजन ना हो पाना भी जातिगत जनगणना ना होने की वजह हो सकता है।
डॉ यादव ने बताया 2011 में हुई जनगणना में जाति का कॉलम था लेकिन अभी तक सरकार ने उसे सार्वजनिक नहीं किया। आगामी 2021 में होने वाली जनगणना में सामाजिक संगठन एवं हर समाज का व्यक्ति यह चाहता है कि इस बार होने वाली जनगणना जातिगत हो जिससे कि हर व्यक्ति को पता लग सके कि किस जाति की संख्या कितनी है और कौन सी जाति किस जाति का हक मार रही है और किस जाति का देश के साधनों और संसाधनों में एकाधिकार है।
