डॉ अरुणेश यादव
यदुवंशी टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क
गौतमबुद्ध नगर ( यूपी) विगत कुछ वर्षों से फेक न्यूज़ और आधी अधूरी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के युवाओं के सामने परोसी जा रही है। जिसे पढ़कर, देख कर और सुनकर युवा भ्रमित हो रहा है और इसी को सच मान रहा है। हमारे देश और आने वाले भविष्य के लिए इस तरह की खबरें ठीक नहीं है।
समाजसेवी और किसान नेता डॉ अरुणेश यादव ने बताया कि अभी हालिया देखने में आया है कि पढ़े-लिखे ग्रेजुएट युवा युवती को हमारे देश के इतिहास एवं स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहीदों द्वारा दी गई कुर्बानी और शहादत की सही सही जानकारी नहीं है। देश का युवा इस समय व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों के जरिए आधी अधूरी जानकारी एवं फेक न्यूज़ को ही सत्य मान रहा है। इस तरह की खबरों को बिना जांचे परखे सत्य मानना एवं दूसरों के सामने पूरे आत्मविश्वास के साथ रखना युवाओं के वर्तमान एवं उनके आने वाले भविष्य के लिए हानिकारक है। इससे देश का युवा नकारात्मक दिशा में जा रहा है और हमारे महापुरुषों एवं स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनका नजरिया बदल रहा है।
डॉ यादव ने बताया कि अभी हालिया कुछ दिनों पहले एक खबर आई थी जिसमें फेसबुक भारत के यूजर्स द्वारा फैलाई जा रही है। फेक न्यूज़, हेट स्पीच इस एवं वायलेंस के वीडियो से बहुत परेशान है इससे फेसबुक की इमेज को धब्बा लग रहा है। फेसबुक ने चिंता जाहिर की कि भारत के 60 परसेंट से ज्यादा उपभोक्ता फेसबुक के माध्यम से गलत खबरें और हिंसात्मक वीडियो एवं बयान का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
डॉ यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा पिनेत्री रुचि पाठक ने तो हद ही कर दी है। रुचि पाठक के अनुसार भारत को आजादी 99 साल की लीज पर मिली है जिसमें जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी की गलती है और 2046 में देश द्वारा ब्रिटिश हुकूमत का गुलाम हो जाएगा। उनका यह इंटरव्यू सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देश के युवा की सोच समझ और उसका दृष्टिकोण सीमित हो चुका है और उनको बीजेपी आईटी सेल द्वारा सम्मोहित कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी इस समय देश के इतिहास को बदलने का काम कर रही है और हमारे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले सभी शहीदों का दुष्प्रचार करने में लगी हुई है।
यदि इस तरह की फेक न्यूज़ और गलत खबरों एवं वीडियो के प्रचार-प्रसार पर पाबंदी ना लगाई गई तो आने वाले दिनों में इसके बहुत ही नकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। देश का युवा अब एनसीईआरटी एवं प्रामाणिक किताबों को पढ़ने में रुचि नहीं रख रहा है। वह इसी तरह से ही खबरों और वीडियोस को ही सच मानकर सार्वजनिक स्थलों पर एवं न्यूज़ चैनलों पर डिलीट करने से भी नहीं हिचक रहा है। भारत के युवाओं बौद्धिक स्तर का इस समय मानसिक गुलामी की तरफ अग्रसर हो रहा है।
