मिश्रौली डोल मेला को इस बार हल्के में ले रहा है जिला प्रशासन

Share◆ प्रशासन की चूक से हुआ था बवाल, डोल आयोजक मंडल के सदस्यो ने उठाई आवाज। ◆ कोतवाल पडरौना के नेतृत्व मे नही हुई पीस कमेटी की बैठक। ◆...

◆ प्रशासन की चूक से हुआ था बवाल, डोल आयोजक मंडल के सदस्यो ने उठाई आवाज।

◆ कोतवाल पडरौना के नेतृत्व मे नही हुई पीस कमेटी की बैठक।

◆ 2004 मे रास्ते के बिवाद को लेकर डोल रोके जाने के बाद शुरू हुआ था बवाल,हालात से निपटने के लिये लगाया गया था दर्जनभर गाँवो मे कर्फ्यू ।

◆ वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया,बैतालपुर रोड पर दिया था धरना।

◆ वर्तमान के राज्य मंत्री राजेश्वर सिहं ने भी किया था धरना प्रर्दशन।

◆ डीजीपी मौके पर पहुंचकर लिया था जायजा,इसके बाद हटाया गया कर्फ्यू ।

◆ लापरवाही के कारण नौ अफसरों को किया गया था सस्पेंड।

यदुवंशी टाइम्स न्यूज नेटवर्क

कुशीनगर जनपद के कोतवाली पडरौना थाना क्षेत्र का चर्चित मिश्रौली,विश्रामपट्टी डोल मेला सुरक्षा की दृष्टी से अति संवेदनशील माना जाता है।आयोजक मंडल के तरफ से इसकी तैयारियां शुरू कर दी गयी है। यह डोल मेला 20 अगस्त को पड़ रहा है। इस मेले को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए जिला पुलिस प्रशासन पहले ही सतर्क हो जाता है। 2004 में रास्ते के बिवाद को लेकर दो समुदाय के लोग आमने सामने हो गये थे। स्थिति को नियन्त्रण मे करने के लिए पुलिस प्रशासन को दर्जन भर गावों मे कर्फ्यू लगाना पड़ा था। इस दौरान प्रशासन की चूक से हुए बवाल के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में जिलाधिकारी,पुलिस अधीक्षक सहित नौ अफसरों को तत्काल सस्पेन्ड कर दिया गया था। तभी से इस डोल मेले को सकुशल सम्पन्न कराना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। इसके मध्यनजर मेले को शान्ति ढंग से निपटाने के लिये भारी तादात मे पुलिस और पीएसी के जवानो को तैनात करना पड़ता है। लेकिन इस बार पुलिस विभाग भी अपनी व्यस्तता के कारण शांति कमेटी की बैठक नहीं करा सकी है,जबकि इस मेले में जिलाप्रशासन,पंचायती राज विभाग और विद्युत विभाग के आलावा राजस्व विभाग की टीम इस बार भी मिश्रौली डोल मेले को हल्के मे ले रहा है,ऐसा न हो की इस लापरवाही का खामियाजा फिर प्रशासन को भुगतना पड़े।

गौरतलब है कि जनपद का चर्चित मिश्रौली डोल मेला का बिवाद सन् 1992 मे बिश्राम पट्टी से निकलकर मिश्रौली बाजार पहुचने वाले मुख्य मार्ग को लेकर शुरू हुआ। डोल निकालते समय दूसरे समुदाय के लोगो ने मस्जिद के सामने से मुख्य मार्ग से डोल को निकलने पर रोक दिया,जिसे लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। कई दुकानों को आक्रोशित लोगो ने आग के हवाले कर दिया था। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिये सैकड़ो लोगो को गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज गया था। हालांकि डोल को भी जेल के हवाले कर दिया गया था। 2003 मे इसी रास्ते के बिवाद को लेकर डोल रोक दिया गया था। इसको लेकर तनाव की स्थिति कायम हो गयी थी। हिंयुवा नेता और वर्तमान में राज्य मंत्री राजेश्वर सिहं के नेतृत्व मे लोगो ने डोल अपने अपने गांव मे रोक दिए और रोड जाम कर धरना प्रदर्शन करना चालू कर दिया था। सूचना पाकर पहुचे तत्कालीन डीएम,एसपी ने पुनः उसी मार्ग से डोल को मिश्रौली बाजार (मेला स्थल )पर लाया गया था,इसके वाद तनाव समाप्त हुआ। इसी रास्ते के बिवाद को लेकर सन् 2004 मे दूसरे समुदाय के लोगों ने विश्राम पट्टी का डोल रोक दिया,इसके बाद तनाव की स्थिति कायम हो गई थी। दर्जन भर गावो के आयोजक मंडल के लोगो ने डोल को मेला स्थल पर लाने से इन्कार कर दिया था,इनकी माँग थी कि जबतक विश्राम पट्टी का डोल नही पहुचेगा तब तक हम लोग डोल नही उठायेंगे । पुलिस सख्त हुई तो पथराव का सामना करना पड़ा था। सुबह से शाम तक बवाल होता रहा,आक्रोशित लोगो ने कई दुकानो सहित एक इन्टर कालेज को आग के हवाले कर दिया था। उसके बाद पुलिस ने सैकड़ो लोगो को गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेज दिया था ।इसकी खबर मिलते ही गोरखपुर के मौजुदा समय के सासंद रहे और बर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देवरिया जेल पहुच अधिकारियों से बार्ता कर गिरफ्तार लोगो को छोड़ने की अपील किया था। लेकिन उनकी बात नही माने जाने पर बैतालपुर के पास धरना प्रदर्शन भी किया गया था। हालात बेकाबू होते देख जिला प्रशासन के निर्देश पर ग्राम सनेरा,मिश्रौली,विश्रामपट्टी, सुसवलिया,सोहरौना,अब्दुलचक ,पटेरा,मेहदीगंज,उपाध्यायछपरा,बरकन्टी,आधारछपरा,सिरसिया दीक्षित,बहादुरगंज,चन्दरपुर, भगत टोला,बसन्तपुर, सहुआडीह,भटवलिया आदि गाँवो मे ऐतिहात के तौर पर पीएसी व पुलिस के जवानो को तैनात कर दिया गया था। और लोगो को घरो से निकलने पर पुरी तरह पाबन्दी लगा दी गयी थी। तीसरे दिन मौके पर पहुचे डीजीपी बुआ सिहं,आईजी,डीआईजी ने दोनो पक्ष के लोगो से बार्ता कर हालात को काबू में किया था। इस घटना की पुरी तरह जायजा लेने के बाद इसकी रिपोर्ट शासन को सौपी गई थी,उसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी,अपर जिलाधिकारी,उप जिलाधिकारी पडरौना,पुलिस अधीक्षक,अपर पुलिस अधीक्षक,क्षेत्राधिकारी पडरौना,कोतवाल पडरौना,एल आईयू स्पेक्टर सहित नौ अफसर सस्पेंड हुए थे। सन् 2005 मे इस डोल मेले को सम्पन्न कराने के लिये जिला के अफसरो के अलावा दो अपर पुलिस अधीक्षक,एक दर्जन सीओ रैपिड एक्शन फोर्स पीएसी,ब्रजवाहन के अलावा अगल बगल जनपद के थानो की सैकड़ों पुलिस के जवानों को भी तैनात किया गया था। तभी से पुलिस के कड़े पहरा के बीच इस डोलमेला को सम्पन्न कराया जाता है।

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