लेखक- संजय चाणक्य
‘‘ एक दिन ठाना उसने बंजर जमीन पर भी बाग उगाउंगा।
जो ना था संभव कभी ऐसा कुछ करके दिखाया उसने।। “
ठीक कहा है किसी ने, व्यक्ति अपने कर्मो से महान होता है। कोई महान पैदा होता तो किसी को महान बनाया जाता है तो कोई अपने कर्मो से महान बनाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कहा जाए कि वह अपनें कर्मो से महान बने है तो तनिक भी गलत नही होगा। कौन जानता था संकरी गली में अपना बचपन गुजारकर चाय बेचने वाला बालक उस बुलन्दी पर पहुचं जायेगा जहा से पूरी दुनिया उसे टकटकी लगाये निहारेगी। यह सोलह आना सच है कि मोदी अपने संघर्ष, त्याग और कर्मठता के दम पर आज उस बुलन्दी को छू लिए है जिसे शायद किसी ने सपने मे भी नही सोचा था। कहना न होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कद दिन-ब-दिन बढता जा रहा है। इसमें कही दो राय नही है कि बिरोधी दलों के लोग मोदी के खिलाफ जितना ही आग उगल रहे है मोदीजी का आत्मविश्वास और हिमालय जैसा विशालकाय कद उतना ही बढता जा रहा है। यही वजह है कि आजादी के साढे पांच दशक बाद देश का कोई प्रधानमंत्री एक के बाद एक इतिहास लिख रहा है और सवा सौ करोड हिन्दुस्तानी उस इतिहास की साक्षी बन रहे है।
‘‘ जिन्दगी ये माना कि काटों भरा सफर है, इससे गुजर जाना ही असली पहचान है!
बने बनाये रास्तों पर तो सभी चलते है, खुद रास्ते जो बनाये वही इन्सान है।!!’’
बेशक! ऐसा पहली बार हुआ जब देश के किसी प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र का मंदिर कहे जाना वाला सदन की सीढियो पर माथा टेक कर अपनें कार्यो की शुरूआत की। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान के वजीरेआला भी खुद को आनें से रोक नही पाये। यह पहली बार ही हुआ जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण लिए और उसके दुसरे दिन से ही विरोधी दल आम जनता को अच्छे दिनों की याद दिलाने लगी। इनकी निर्लजता तो देखियें दस सालों तक जनता को मूर्ख बनाकर वादाखिलाफी करने वाालो को यह तनिक भी याद नही रहा कि वह अपनी कथनी और करनी पर कब खरा उतरे थे। यह वही तबका है जो नरेन्द्र मोदी के पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर आज प्रधानमंत्री बनने के बाद भी विरोध करते आ रहा है जो सिर्फ और सिर्फ मोदी की कमी तलाशते हुए अपने राजनीति की आधे से अधिक उम्र बिना खदी-बदी में गवा चुके है। ऐसा पहली बार हुआ है कि नरेन्द्र दामोदर मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही आम जनमानस को लगने लगा कि दिल्ली में कोई सरकार काम कर रही है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से संबोधित करते हुए किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार कहा कि दिल्ली के लिए मै नया हूं। सवा सौ करोड हिन्दुस्तानियों को यह पहली बार देखने को मौका मिला कि उनके देश का प्रधानमंत्री जहा भी गए वहा के राष्टाध्यक्ष प्रोटोकाल तोडकर उनका इसतक्वाल करने से खुद को रोक नही पाते है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अमेरिका यात्रा पर गए नरेन्द्र मोदी ने वहा भी इतिहास रचा। पांच दिनों के अमेरिका दौरे मे मोदी ने पैत्तीस सम्मेलनों में हिस्सा लिया। इतना ही नही संयुक्त राष्ट्रसंघ के सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के मंच पर मोदी जी ने न सिर्फ अपना प्रभाव छोडा़ बल्कि एक कुशल राजनीतिज्ञ की तरह भारत-अमेरिकी रिश्ते को नये आयाम तक पहुचाया। यह कहने में तनिक भी गुरेज नही है कि किसी विदेशी नेता द्वारा विश्व के सबसे ताकतवर देश कहलाने वाला अमेरिका में अब तक सबसें बडी जनसभा को संबोधित करने का गौरव हिन्द के प्रघानमत्री नरेन्द्र मोदी को मिला है। इतना ही नही रेडियो और टीवी पर नौनिहालो को नसीहत देकर प्रधानमंत्रीजी ने देश के भविष्यों को अपना मुरीद बना लिया। यह पहली बार ही हुआ जब देश के प्रधानमंत्री स्कूली बच्चों से रू-ब-रू हुए तो बिल्कुल स्कूली मास्टर के तरह दिखे उन्होने नौनिहालो से एक अध्यापक की तरह सवाल भी पूछा और बच्चों द्वारा पूछे गए सवाल का जबाब भी दिया। एक अभिभावक बनकर बच्चों को नसीहत दी तो दोस्त बनकर कर अपने जिन्दगी से जुडे खट्टी-मिट्ठी यादों का साझाा भी किया। उनकी सादगी आज भी कही न कही उन बच्चों के मस्तिष्क पटल पर तैर रही होगी। महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री के जन्मदिवस पर पूरे देश मे मोदी ने जो स्वच्छता अभियान का शंखनाद किया वह भी अपनें आप में एक अनोखा है। मोदी के इस अभियान के शुरू होने से पूर्व विरोधी दलों को शायद यह अभास भी नही था कि मोदी के स्वच्छ भारत-स्वस्थ्थ भारत का यह अभियान इतना सफल हो जायेगा कि दुनिया के अन्य देशों में भी इसकी चर्चाए शुरू हो जायेगी। ऐसा पहली बार ही हुआ जब देश का प्रधानमंत्री खुद को प्रधान सेवक कहकर काशी की जनता से पूछा कि बताये मुझे क्या करना है । जयापुर की प्रधान दुर्गावातीदेवी तो आज भी मोदी के भुला नही पा रही है कभी सपने में भी नही सोची थी देश के प्रधानमंत्री के सामने जब वह संबोधित करेगी तो उनका माइक स्वयं प्रधानमत्री ठीक करेगे। आज भी उन्हे यह सपने जैसा लग रहा है जब मोदी ने उनसे कहा कि सबने कुछ न कुछ करने के लिए कहा है आप भी बताये हम क्या करे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह सादगी और अपनापन तो जयापुर के बाशिन्दों के जेहन में बस गया। धूर्त पाकिस्तानी सैनिको द्वारा बार बार सीज फायर का उल्घंन करने पर उनको उनकी औकात दिखाते हुए मोदी ने कहा कि “सरहद पर बोली नही गोली बोलती है।” मोदी सरकार के किसी मंत्रिमंडल के सदस्य पर कोई भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। कहा जाए तो मोदी सरकार की यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। किसी भी देश की सरकार बिना किसी घोटाले या भ्रष्टाचार के दाग़ लगे बिना अपना कार्यकाल पूर्ण करने की तरफ अग्रसर हो तो यह बात उस सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि उस देश के लिए भी शुभ संकेत है। हा साढे तीन साल बाद परिस्थितियों मे कुछ बदलाव हुआ है। पीएनबी का 11 हजार करोड़ रुपये घोटाले का एक मामला सामने जरूर आया है इसमें मोदी सरकार प्रत्यक्ष रुप से भले ही दोषी नही है लेकिन अप्रत्यक्ष रुप से हुई इस सरकार की लापरवाही को भी नजरअन्दाज नही किया जा सकता है। लेकिन इस घोटाले के बाद मोदी सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई और उस कार्रवाई की जद मे तीन दिन के भीतर नीरव मोदी की 5 हजार करोड की जब्ती के लिए उठाया गया कदम सराहनीय है। मोदी सरकार ने साढे तीन सालों में कई क्रांतिकारी और जनहित के फैसले लिए, जो कि सीधे समाज के अन्तिम व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते साढे तीन वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, साथ ही साथ अनेक सफलताएं भी पाई हैं। लेकिन इन उपलब्धियों और सफलताओं में सरकार को अपनी कमियों और कमजोरियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक के अपने कार्यकाल में जिस प्रकार से अनेक चुनौतियों का सामना किया, उसी प्रकार आने वाले सालों में भी उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इन साढे तीन वर्षों में मोदी सरकार द्वारा लिया गया सबसे बड़ा फैसला 8 नवंबर 2016 को पाच सौ और एक हजार के नोटों का विमुद्रीकरण करना रहा। इस फैसले से देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था में फैले कालेधन पर मोदी सरकार ने चोट की और इसमें प्रधानमंत्री मोदी सफल भी रहे।
बेशक! भारत सरकार के नोटबंदी का फैसला देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था में फैले कालेधन के खिलाफ सकारात्मक कदम रहा। सरकार के एक कदम ने ही कालाबाजारियों के कालेधन को रद्दी का कागज बना दिया। जिन लोगों ने अवैध तरीकों से अर्जित किया हुआ धन अपने घरों में जमा कर रखा था, ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार की यह कार्रवाई सराहनीय और अकाल्पनिक थी।एक समय विपक्ष के विरोध को देखकर ऐसा लग रहा था कि कहीं भाजपा को इस क्रांतिकारी फैसले का खामियाजा न भुगतना पडे। लेकिन 2017 में 5 राज्यों (उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर) में हुए विधानसभा चुनावों में लोगों ने भाजपा के पक्ष में अपना बहुमत देकर पीएम मोदी के इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। भाजपा ने अपनी चतुराई और सूझबूझ से पंजाब को छोड़कर बाकी के 4 राज्यों (उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर) में अपनी सरकार बनाई। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में तो भाजपा ने तीन-चौथाई बहुमत से अपनी सरकार बनाई।
नोटबंदी के अलावा मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति और बेनामी लेन-देन पर शिकंजा कसने के लिए कानून में संशोधन करके इसे सख्त बनाया है, जो क्रान्तिकारी कार्रवाई से कम नही आकी जा सकती है। संशोधित कानून में सरकार के पास बेनामी संपत्तियों को जब्त कर उन्हें सील करने का अधिकार है। साथ ही, जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान है। भारत में कालेधन की बढ़ती समस्या को खत्म करने की दिशा में मोदी सरकार का यह एक बड़ा कदम है। इसके अलावा लंबे समय से अटके पड़े वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) बिल को पारित करवाकर देश में लागू करा पाना भी मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन मोदी सरकार ने इस चुनौती का सामना करते हुए अंतत: सफलता प्राप्त की। जीएसटी के माध्यम से संपूर्ण देश में वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान कर लगाकर प्रधानमंत्री ने देश के सभी नागरिकों और व्यापारियो को सीधे लाभ पहुचाने और कालाबाजारियों पर नकेल कसने का पुरजोर प्रयास किया है। इसके साथ ही ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ भी सरकार की एक सराहनीय प्रयास रहा। इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार साढे तीन सालों में तकरीबन साढे पाच करोड गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दे कर ऐतिहासिक कार्य किया है। जनधन योजना के तहत जिन लोगों का बैंक में खाता नहीं था, उनका प्रधानमंत्री की जनधन योजना के तहत खाता खोला गया। इस योजना में लोगों का जीरो बैलेंस पर खाता खोला गया और गरीबों को उनको मिलने वाली योजना का पैसा सीधे उनके खाते में भेजा जाने लगा। इस कार्यक्रम के शुरू होने के पहले दिन ही डेढ़ करोड़ बैंक खाते खोले गए थे और हर खाता धारक को 1,00,000 रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया गया। इसके तहत अबतक लगभग 22 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोले जा चुके हैं जो अपने आप मे एक अकाल्पनिक रिकार्ड है। स्वच्छ भारत अभियान अब सिर्फ एक कार्यक्रम मात्र नहीं रह गया है, यह एक तरह का व्यवहार परिवर्तन का मिशन बन गया है। जन सहभागिता से चलने वाले इस अभियान का दायरा 2014 के 42 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 62 फीसदी हो गया है। ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2017’ के परिणामों से पता चलता है कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत किये जा रहे प्रयासों से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता पर सकारात्मक असर पड़ा है। यही कारण है कि स्वच्छ भारत अभियान आज स्वतंत्र भारत का बहुत ही महत्वपूर्ण जन आंदोलन बन चुका है। देश को स्वच्छ करने की जो पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, वैसा पहले कभी किसी ने नहीं सोचा था। प्रधानमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक योजना है ‘डिजिटल इंडिया’ ।इसकी शुरुआत 21 अगस्त, 2014 को हुई थी। इस योजना का मकसद भारत को एक इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था में बदलना है। सरकार की मंशा है कि सभी सरकारी विभाग और भारत की जनता एक दूसरे से डिजिटल रूप से या इलेक्ट्रॉनिक तौर पर जुड़ें ताकि प्रभावी प्रशासन चलाया जा सके। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इसके तहत देश के सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना है। विमुद्रीकरण के फैसले से भले ही लोगों को थोड़े समय के लिए परेशानी उठानी पड़ी हो, लेकिन इससे देश का डिजिटलाईजेशन हुआ। हाथ में पैसे न होन पर लोगों ने डिजिटल तरीकों पर गौर करना शुरू किया। मोदी सरकार ने कैशलेस इंडिया के लिए भीम ऐप की भी शुरूआत की। इतना ही नही सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब भी दिया। नियंत्रण रेखा पर तो भारत ने पाक को सबक सिखाया ही, इसके अलावा म्यांमार में आतंकियों के खिलाफ सैन्य-अभियान भी चलाया। यह कहने मे तनिक भी गुरेज नहीं है कि देश की रक्षा के मसले में मोदी सरकार ने स्पष्ट रुख अपना रखा है। जी हा! ऐसा पहली बार हुआ जब देश का कोई प्रधानमंत्री सत्ता मे आने के बाद जनता से सीधे संवाद करने के लिए भारत के सरकारी संवाद माध्यम ऑल इंडिया रेडियो का सहारा लिया और ‘मन की बात’ नाम से एक कार्यक्रम शुरू की शुरुआत की। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी द्वारा सीधे तौर पर जनता से सवांद स्थापन किया गया। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम आज देश में अत्यंत लोकप्रिय है और जनता की तरफ से अक्सर इसको निरंतर जारी रखने की बात होती रही । सड़कों की बात करें तो एक लाख 20 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कोई सामान्य बात नहीं है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2016-17 में 48,000 किमी सड़क निर्माण कराया गया है और हर रोज 133 किमी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। 2013-14 में रोजाना 69 किमी सड़क का ही निर्माण होता था। यूपीए सरकार के 10 साल के कार्यकाल से ज्यादा घर मोदी सरकार में मिले हैं और 17,73,533 किफायती घरों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। महिला सशक्तिकरण को लेकर भी भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। वही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम का संचालन कर मोदी ने न सिर्फ “कन्या भ्रूण हत्या” पर अंकुश लगाने का प्रयास किया है बल्कि बेटियो के सुनहरे भविष्य को प्रशस्त करने का सार्थक पहल किया गया है, जो सफल कार्यक्रम साबित हो रहा है।
‘‘ ना सर झुका है कभी ना झूकायेगे कभी।
जो अपने दम पर जिए सच में जिन्दगी है वही।।’’
।। सत्यमेव जयते ।।