यदुवंशी टाइम्स न्यूज नेटवर्क
कुशीनगर। जनपद के गाँव और शहर के छठ घाटों पर शुक्रवार को व्रती माताओं ने उगते हुए भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया और पूजा-अर्चना कर सुख, शांति व सुख समृद्धि की कामना की। चार दिनो तक चलने वाले इस महापर्व के आखिरी दिन शुक्रवार को सुबह व्रती माताए उगते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर उपवास तोड़ी और इसी के साथ व्रत सम्पन्न हुआ। छठ पूजन के अवसर पर गांव से लेकर शहर तक घाटों पर श्रद्धा का सैलाब दिखा। जिले के प्रमुख बाजार व कस्बों समेत नगरीय क्षेत्र के रंग-बिरंगी रोशनी से नहा उठे घाटों का नजारा देखने लायक था। भक्ति भाव से ओत प्रोत हर कोई बस भगवान भाष्कर की ओर ही निहार रहा था। आंखों से टकटकी लगाए व्रती महिलाएं पानी में खड़ा होकर अर्घ्य दे रही थीं।

▪️जिले हर घाटों पर सुरक्षा को लेकर किया गया पुख्ता इंतजाम
षष्ठी छठ के चौथे दिन पर्व को लेकर व्रती महिलाएँ घाट से लेकर विभिन्न नदियों के तटों, तालाब और जलाशयों पर पहुंची और भगवान भास्कर की विधिवत पूजा-अराधना की। घाटो पर छठ पूजा के पारंपरिक गीत गूंजते रहे। जिले के सभी छठ घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे।
▪️उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का हुआ समापन
खरना के साथ ही व्रती माताओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास पर्व के चौथे और अंतिम दिन यानी शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालुओं का व्रत संपन्न हुआ। इसके बाद व्रती महिलाएं अन्न-जल ग्रहण कर ‘पारण’ किया। हिंदू परंपरा के अनुसार, कार्तिक और चैत्र माह में छठ व्रत का आयोजन होता है। इस दौरान उपवास रहने वाली माताये भगवान सूर्य की अराधना करती हैं।
