पितृ पक्ष का महत्व

Shareकुशीनगर। यदुवंशी टाइम्स के संवाददाता से वार्ता के दौरान पण्डित अशोक तिवारी ने पितृ पक्ष (महालय पर्व) के महत्व बारे कुछ इस प्रकार की जानकारियां दी। दिनांक – २४...

कुशीनगर। यदुवंशी टाइम्स के संवाददाता से वार्ता के दौरान पण्डित अशोक तिवारी ने पितृ पक्ष (महालय पर्व) के महत्व बारे कुछ इस प्रकार की जानकारियां दी।

दिनांक – २४ सितम्बर २०१८ से ८ अक्टूबर २०१८

श्राद्ध क्या है?

देश काले च पात्रे च श्रद्धया विधिना च यत्।
पितृनुद्दिश्य विप्रेभ्यो दत्तं श्राद्धमुदाहृतम्।।
-पाराशर स्मृति

देश काल और पात्र में विधि पूर्वक श्रद्धा से पितरों के उद्देश्य से विप्रों को जो (अन्न, वस्त्रादि उपभोग्य वस्तु) दिया जाय वह क्रिया श्राद्ध है। देवी भागवत का एक श्लोक है –
जीवितो वाक्य करणात्, क्षयाहे भूरि भोजनात्।
गयायां पिण्ड दानाच्च, त्रिभिर्पुत्रस्य पुत्रता।।
अर्थात् – जीवन पर्यन्त माता पिता की आज्ञा का पालन, मृत्योपरान्त श्राद्ध मे खूब भोजन कराना एवं उनके निमित्त गया मे जाकर पिण्डदान करने वाले पुत्र की पुत्रता सार्थक है।

महालय पर्व पक्ष के लिए कहा गया है कि
कन्यागते सवितरि पितरो यान्ति वै सुतान।
अमावस्या दिने प्राप्ते गृह द्वारं समाक्षिता:।
श्राद्धा भावे स्वभवनं शापं दत्वा व्रजन्ति ते।।
न तत्र वीरो जायन्ते, नारोग्यं न शतायुषम्।
न यो श्रेयोSप्यधि गच्छन्ति यत्र श्राद्धं विवर्जितम्।।
– धर्म सिंधु, हारित स्मृति

अर्थात्- (कन्या के सूर्य में अाश्विन मास कृष्णपक्ष ‘महालय पर्व’ या ‘पितृ पक्ष’ कहलाता है।)
महालय पक्ष अथवा अमावस्या आने पर वे पितृगण तृप्ति की कामना लेकर अपने पुत्रादि के गृहद्वार पर आश्रित होकर श्राद्ध की प्रतिक्षा करते है। किन्तु पुत्र के घर में श्राद्ध का अभाव देखकर वे पितृगण रुष्ट होकर अपने वंशज को श्राप देकर चले जाते है, तथा उनके श्राप से उस वंश की वृद्धि नहीं होती, सभी रोगी होते है, तथा अल्पायु होकर मरणोपरान्त नरक गामी होते है।

इस वर्ष श्राद्ध की तिथियों का निर्णय-

पूर्णिमा श्राद्ध- 24 सितम्बर, सोमवार
प्रतिपदा श्राद्ध – 25 सितम्बर, मंगलवार
द्वितीया श्राद्ध – 26 सितम्बर,बुधवार
तृतीया श्राद्ध – 27 सितम्बर,गुरुवार
चतुर्थी श्राद्ध – 28 सितम्बर,शुक्रवार
पंचमी श्राद्ध – 29 सितम्बर,शनिवार
षष्ठी श्राद्ध – 30 सितम्बर,रविवार
सप्तमी श्राद्ध – 1 अक्टूबर,सोमवार
अष्टमी श्राद्ध – 2 अक्टूबर,मंगलवार
नवमी श्राद्ध – 3 अक्टूबर,बुधवार सौभाग्यवती स्त्रीणां श्राद्ध।
दशमी श्राद्ध – 4 अक्टूबर,गुरुवार
एकादशी श्राद्ध -5 अक्टूबर,शुक्रवार
द्वादशी /त्रयोदशी श्राद्ध 6 अक्टूबर, शनिवार सन्यासी- वैष्णवानाम् श्राद्ध।
चतुर्दशी श्राद्ध – 7 अक्टूबर, रविवार शस्त्रादि हतानां श्राद्ध।
अमावस्या श्राद्ध – 8 अक्टूबर, सोमवार सर्व पैत्री श्राद्ध।

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