दीपावली (दिवाली) पर्व का महत्व

Shareपरमेश्वर यादव हिंदी कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक मास के अमावस की रात को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है । हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है।...

परमेश्वर यादव

हिंदी कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक मास के अमावस की रात को दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है । हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है|
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है|
दीपावली को दीपोत्सव यानी की दीपो का उत्सव भी कहते हैं| भारतवर्ष में सबसे ज्यादा धूम धाम से मनाये जाने वाले
दीपावली के त्यौहार का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है|

“तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो – दीपावली का त्यौहार इस वाक्य को बिलकुल सही सिद्ध करता है.

महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखी रामायण में बताया गया है की – भगवन विष्णु के 10 अवतारों में से सातवे अवतार श्री राम चन्द्र जी का है|

अयोध्या के राजा श्री दशरथ जी के भगवान श्रीराम सबसे बड़े पुत्र थे| माता केकई के कहने पर पिता दशरथ ने अपने जान से प्यारे सुपुत्र राम को 14 वर्ष के वनवास और भरत के अयोध्या की राजगद्दी दी।
पिता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवन राम वनवास के लिए अपनी पत्नी सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ वनवास
के लिए निकल गए।

13 वर्ष 2 माह का वनवास समाप्त होने के बाद सीता जी को रावन ने हरण कर उनको अपने देश लंका के अशोक वाटिका में पहुचा दिया|

अत्यधिक परिश्रम के बाद भगवन श्री राम और उनके भाई लक्ष्मण जी हनुमान संग बानर सैनिकों के मदद से लंका पहुचे ।दस दिन के महायुद्ध के बाद भगवन श्री राम ने रावन पर विजय प्राप्त कर लिया और साथ ही उनका 14 वर्ष का वनवास की अवधि भी समाप्त हो गई ।जब भगवान श्री राम, पत्नी सीता मैया और भाई लक्ष्मण के साथ रावन से युद्ध जीत कर अपने देश अयोध्या लौटे तो उस रात अमावास की रात थी ।सभी अयोध्या वासियों ने अपने राजा का स्वागत के लिए पुरे अयोध्या राज्य की साफ़ सफाई कर, घी के दिए जला कर उनका स्वागत किया । कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी.

उसी दिन से कार्तिक माह के अमावास को सभी हिन्दू अपने अपने घरो और दुकानों की साफ़ सफाई करते हैं और रात में दिया जलाते हैं, नए कपडे पहनते हैं,और अपने दोस्तों एवं पड़ोसियों के साथ मिठाई बाट कर त्यौहार मनाते हैं.

भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं।

दीपावली विशेष रूप से स्वच्छता और प्रकाश का पर्व है। आज कल तो कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं| सब अपने-अपने घरों, दुकानों आदि की साफ़ सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं.
दीपावली के उत्सव पर लोग अपने घरों की मरम्मत, सफ़ेदी आदि का कार्य करवाते हैं|

आज कल दिया के साथ-साथ लोग अपने घरो और दुकानों को लडियो से दुल्हन के रूप में सजाते हैं|
बच्चे पटाखे और फूलझड़ी जला कर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं। कुछ लोग अपने घरो के बाहर रंगोली भी बनाते हैं|
लोग इस दिन माता लक्ष्मी जी की विशेष पूजा करते हैं|
तरह – तरह के लोग पकवान भी खाते और खिलाते हैं|
दीपावली की विशेष कर हर स्कूल, कॉलेज और ऑफिस में छुट्टी दी जाती है|
दिवाली पर विशेष कर अब बोनस भी मिलता है, जिससे हर इन्सान मिठाई और पटाके खरीद सके ।
दिवाली के उपलक्ष में काफी दुकानों पर तरह-तरह के ब्रांड पर ऑफर्स भी निकले जाते हैं|
घर के दुआर पर और मंदिर के पास माता लक्ष्मी के चरण कमल के निसान बनाते हैं ।

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