परमेश्वर यादव
कुशीनगर पडरौना नगर से लगभग दस किलो मीटर उत्तर -पूर्व की दिशा में धार्मिक आस्था का केन्द्र बाँसी धाम (बाँसी घाट ) स्थिति है । बाँसी नदी उत्तर प्रदेश-बिहार का बार्डर है ।नदी इसपार उत्तर प्रदेश तो उसपार बिहार है।बासी घाट से लगभग एक किलोमीटर उत्तर- पश्चिम की ओर रामघाट है । रामघाट नाम क्यों पड़ा जरा इस पर प्रकाश डालते हैं। त्रेता युग में भगवान राम जनकपुर से माता सीता से विवाह करके अयोध्या के लिये आ रहे थे कि बाँसी नदी पर आते- आते शाम हो गई ।तब भगवान राम पूरे परिवार सहित यही रुके और रात्रि विश्राम किया ।तत्पश्चात इस नदी में स्नान दान करने बाद अयोध्या के लिए प्रस्थान किये।इसीलिए इस जगह को राम घाट के नाम से जानते है औरतब से यह विशेष रूप से धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया।

बताते चलें कि हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन लाखों की संख्या में यूपी बिहार से श्रद्धालुओं का भीड़ एकदिन पहले से एकत्रित होती है और बांसी नदी में स्नान कर , पूजा अर्चना के बाद संकल्प ले गौ दान करते हैं।इस नहान मेले में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक देखी गई।
आकर्षण का केंद्र बना झूला।
बांसी मेले में बाहर से आए झूला, सर्कस, जादूगर आदि आकर्षण का केंद्र बने रहे। जिसमें खासकर बच्चों एवं युवाओं की अच्छी खासी भीड़ देखी गई। वहीं देर रात तक झूला के लिए लोगों का तांता लगा रहा। बांसी मेले में आए श्रद्धालुओं के विश्राम के मनोरंजन के लिए राजनीतिक दलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भोजपुरी सिनेमा जगत के जाने माने कलाकारो ने अपने भक्ति गीतों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुति सराहनीय रही। जिसमें यूपी बिहार के अलावा मुंबई के आए कलाकारों द्वारा भोजपुरी गीतों से मेले में आए श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया गया। श्रद्धालुओं का हाल जानने के लिए स्थानीय पीएचसी द्वारा बांसी चौकी पर कैंप लगाकर मेले में आए श्रद्धालुओं का इलाज किया गया। वहीं डा.सहित एएनएम द्वारा मेले में घूमकर श्रद्धालुओं का हाल जाना गया। ऐतिहासिक बांसी मेले को लेकर स्थानीय पुलिस द्वारा विशेष चौकसी बरती गई। इस दौरान महिला पुलिस व पुरुष पुलिस को मेले में तैनात किया गया था।