कुशीनगर। सिविल सोसायटी के अध्यक्ष गिरीश चंद चतुर्वेदी ने जिलधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है ।जिसमें कहा है कि पडरौना चीनी मिल तीस बार नीलम हो चुकी है, लेकिन नीलामी प्रक्रिया असफल साबित हुई है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया है, क्योंकि किसानों का बंद पड़ी चीनी मिल पर गन्ने के मूल्य भी करोड़ों रुपया बकाया पड़ा हुआ है। लेकिन नीलामी के खेल में किसान व मजदूर पीसा जा रहा है।तथा उन्होंने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के अनुपालन में पडरौना चीनी मिल चलाए जाने का एक मात्र विकल्प उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसका अधिग्रहण करके चलाया जाय। जिससे किसानों और मजदूरों का भला हो सके
इस सम्बंध में डीएम को सौंपे शिकायती प्रार्थना पत्र में श्री चतुर्वेदी ने जिक्र किया है कि पडरौना चीनी मिल की नीलामी प्रक्रिया वर्ष 2014 से गन्ना आयुक्त लखनऊ द्वारा जारी वसूली प्रमाण पत्र के माध्यम से होता रहा है, विगत 4 वर्षों में जिला प्रशासन व पडरौना तहसील प्रशासन द्वारा आयोजित लगभग तीस नीलामी प्रक्रिया में बेमतलब साबित हुई है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के अलावे किसान, मजदूरों का भी करोड़ों रुपया बकाया पड़ा हुआ है ।वर्तमान परिवेश में इस चीनी मिल के नहीं चलने से जहां किसानों को भारी परेशानियों का दंभ झेलना पड़ रहा है, वहीं इस चीनी मिल में कार्य करने वाले मजदूर भी बेहाल पड़े हुए हैं। यह चीनी मिल 2011 से बंद पड़ा हुआ है इसे चलाने के लिए चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिला मुख्यालय पर चुनावी सभा के दौरान चालू कराने की बात कही थी ,मगर चीनी मिल चालू कराने का अभी तक कोई पहल नहीं हो सका है। चीनी मिल का वर्तमान हालात यह है कि उसके कल पुर्जे चालू हालत में है। इस मिल की भू परिसंपत्तियां भी अरबों रुपए की हैं ।